Constitution of India
अनुच्छेद

लेख 224

भारत का संविधान

अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति

[224(1) यदि किसी उच्च न्यायालय के कार्य में किसी अस्थायी वृद्धि के कारण या उसमें कार्य की बकाया के कारण राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि उस न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या को तत्समय बढ़ा देना चाहिए तो राष्ट्रपति सम्यक रूप से अर्हित व्यक्तियों को दो वर्ष से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए, जो वह विनिर्दिष्ट करे, उस न्यायालय के अपर न्यायाधीश नियुक्त कर सकेगा।[18]
(2) जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न कोई न्यायाधीश अनुपस्थिति के कारण या अन्य कारण से अपने पद के कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है या मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में अस्थायी रूप से कार्य करने के लिए नियुक्त किया जाता है, तब राष्ट्रपति सम्यक रूप से अर्हित किसी व्यक्ति को तब तक के लिए उस न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त कर सकेगा, जब तक स्थायी न्यायाधीश अपने कर्तव्यों को फिर से नहीं संभाल लेता है।
(3) उच्च न्यायालय के अपर या कार्यकारी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त कोई व्यक्ति [बासठ वर्ष]** की आयु प्राप्त कर लेने के पश्चात पद धारण नहीं करेगा।]*

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* संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 15 द्वारा अनुच्छेद 224 के स्थान पर प्रतिस्थापित।

** संविधान (पंद्रहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 6 द्वारा "साठ वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
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