33वाँ संशोधन
भारत का संविधान (33वाँ संशोधन) अधिनियम, 1974
भारत के संविधान में एक और संशोधन किया गया।
इस संशोधन द्वारा संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडलों से त्यागपत्र दिए जाने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए अनुच्छेद 101 तथा 120 में संशोधन किया गया।
संशोधन अनुच्छेद में यह उपबंधित है कि संसद और राज्य-विधानमण्डलों के सदस्यों द्वारा दिये गये त्यागपत्र को अध्यक्ष (स्पीकर) तभी स्वीकार करेगा यदि उसे इस बात का समाधान हो जाए कि त्यागपत्र स्वेच्छा से दिया गया है।
यदि उसे विश्वास हो जाए कि त्यागपत्र स्वैच्छिक नहीं है या धमकी के कारण दिया गया है तो वह उसे स्वीकार नहीं करेगा।
मूल अनुच्छेद के अनुसार ऐसे त्यागपत्र अध्यक्ष (स्पीकर) को दिये जाने पर स्वत: प्रभावी हो जाते थे।
भारत के संविधान में एक और संशोधन किया गया।
इस संशोधन द्वारा संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडलों से त्यागपत्र दिए जाने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए अनुच्छेद 101 तथा 120 में संशोधन किया गया।
संशोधन अनुच्छेद में यह उपबंधित है कि संसद और राज्य-विधानमण्डलों के सदस्यों द्वारा दिये गये त्यागपत्र को अध्यक्ष (स्पीकर) तभी स्वीकार करेगा यदि उसे इस बात का समाधान हो जाए कि त्यागपत्र स्वेच्छा से दिया गया है।
यदि उसे विश्वास हो जाए कि त्यागपत्र स्वैच्छिक नहीं है या धमकी के कारण दिया गया है तो वह उसे स्वीकार नहीं करेगा।
मूल अनुच्छेद के अनुसार ऐसे त्यागपत्र अध्यक्ष (स्पीकर) को दिये जाने पर स्वत: प्रभावी हो जाते थे।
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